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Tuesday, 15 April 2014

डायरी 18/12/13 राजनयिक बनाम नौकरानी





आज दिनांक 18-12-13 के हिन्दुस्तान अख़बार में एक संपादकीय टिप्पणी छपी है - राजनयिक का अपमान। इसके अन्तर्गत अमेरिकी सरकार द्वारा भारतीय राजनयिक के अपमान पर क्षोभ प्रकट किया गया है। एक तरह से तो यह ठीक जान पड़ता है। किन्तु मैं यहाँ एक बात जोड़ना चाहता हूँ:  न्यूयार्क में भारत की देवयानी खोबरागड़े के खिलाफ यह आरोप लगाया गया है कि  वे अपने नौकर को न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देती हैं। इसके अलावा अपनी नौकरानी के लिए अमेरिकी वीज़ा हासिल करने के लिए जो नियम है उसका देवयानी ने पालन नहीं किया है। भारत सरकार और मीडिया अमेरिकी प्रशासन का विरोध कर रही है किन्तु उस नौकरानी की बात कोई नहीं कर रहा। इस बात की भी जाँच करने की ज़रूरत है कि क्या नौकरानी को आवश्यक मजदूरी दी जा रही थी ? आखि़र उस नौकरानी के भी तो कुछ मानवाधिकार हैं, क्या भारतीय राजनयिक द्वारा उसके मानवाधिकार पर ध्यान दिया जा रहा था या नहीं

        

प्रमोद कुमार बर्णवाल

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